तो दिल टूट जाता है,
दर्द का दरिया उमड़ता है कभी,
कभी गुस्से का उफान,
खालीपन सा घर कर लेता है
सीने में
और फिर हम फिर उस खालीपन
को भरते हैं फज़ूल चीजों से,
दर्द के दरिया को
बनाओ प्यार का समंदर
और सींचो सूखते पौधों को,
अपने खालीपन को भर दो
नए सपनों से,
और इन सपनों को करो पूरा
अपनी मेहनत से।