ज़िन्दगी में फैसलों की बहुत अहमियत होती है। जो फैसले आप के लिए गलत होते हैं वो दूसरों के लिए सही हो सकते हैं। आपके लिए हुए गलत फैसले आप के अपनों के लिए भी सही हो सकते हैं। कुछ दिक्कते बहुत ही ज़मीनी होती हैं। पुराने मर्ज़ जिनका इलाज बहुत ज़रूरी होता है। वो शुरुआती दिक्कत और शुरुआती परेशानी।
वो भी क्या दिन थे जब सौ वाट की रौशनी में मैं बैठा पढ़ा करता था। जब नया स्कूल बैग मिलता था तो लगता था कि दुनिया मिल गयी। जब अपने अलावा दुनिया की कोई फिकर न थी। जब सारी सोच खुद पर शुरू हो कर खुद पर खत्म होती थी।
कुछ लोग वाकई में घटिया होते हैं। शुरुआत में इस बात पर यकीन करना मेरे लिए आसान न था। पर दुनिया धीरे धीरे अपने राज़ खोलने लगी और मैं पहले की तरह बेखबर न रहा।
ख़ुशी के अपने राज़ होते हैं। ग़म की अपनी वजहें होती हैं। अपनी लगाम दूसरों के हाथों में देने से आप ज़िन्दगी भर भागते रहते हैं। अगर आप लगाम खींचने से नहीं दौड़े तो फिर एक करारा चाबुक आपकी पीठ पर आ के लगता है।
सोच कहाँ से कहाँ ला कर खड़ा कर देती है। मौके लेना एक ज़रूरी चीज़ है। लालच एक बुरी बला है। पर बुरी बलाएँ ज़िन्दगी बदलने के लिए ज़रूरी है। कभी लालच न करने का सिला भी इतना अच्छा नहीं हुआ क्योंकि ज़िन्दगी के अपने हिसाब हैं।
हर वक़्त आप आगे बढ़ते रहे और ज़िन्दगी पीछे छूटती रही। हर चीज़ खुद से होती है और अंदर से होती है। आप नयी चीज़ें जानते हैं और पुरानी चीज़ों को पीछे छोड़ते हैं। नयी चीज़ें जानना ज़रूरी है, और गैर ज़रूरी चीज़ों को छोड़ना भी।