Saturday, 28 November 2015

ख़ुशी

ज़िन्दगी में फैसलों की बहुत अहमियत होती है। जो फैसले आप के लिए गलत होते हैं वो दूसरों के लिए सही हो सकते हैं। आपके लिए हुए गलत फैसले आप के अपनों के लिए भी सही हो सकते हैं। कुछ दिक्कते बहुत ही ज़मीनी होती हैं। पुराने मर्ज़ जिनका इलाज बहुत ज़रूरी होता है। वो शुरुआती दिक्कत और शुरुआती परेशानी।

वो भी क्या दिन थे जब सौ वाट की रौशनी में मैं बैठा पढ़ा करता था। जब नया स्कूल बैग मिलता था तो लगता था कि दुनिया मिल गयी। जब अपने अलावा दुनिया की कोई फिकर न थी। जब सारी सोच खुद पर शुरू हो कर खुद पर खत्म होती थी।

कुछ लोग वाकई में घटिया होते हैं। शुरुआत में इस बात पर यकीन करना मेरे लिए आसान न था। पर दुनिया धीरे धीरे अपने राज़ खोलने लगी और मैं पहले की तरह बेखबर न रहा।

ख़ुशी के अपने राज़ होते हैं। ग़म की अपनी वजहें होती हैं। अपनी लगाम दूसरों के हाथों में देने से आप ज़िन्दगी भर भागते रहते हैं। अगर आप लगाम खींचने से नहीं दौड़े तो फिर एक करारा चाबुक आपकी पीठ पर आ के लगता है।
सोच कहाँ से कहाँ ला कर खड़ा कर देती है। मौके लेना एक ज़रूरी चीज़ है। लालच एक बुरी बला है। पर बुरी बलाएँ ज़िन्दगी बदलने के लिए ज़रूरी है। कभी लालच न करने का सिला भी इतना अच्छा नहीं हुआ क्योंकि ज़िन्दगी के अपने हिसाब हैं।

हर वक़्त आप आगे बढ़ते रहे और ज़िन्दगी पीछे छूटती रही। हर चीज़ खुद से होती है और अंदर से होती है। आप नयी चीज़ें जानते हैं और पुरानी चीज़ों को पीछे छोड़ते हैं। नयी चीज़ें जानना ज़रूरी है, और गैर ज़रूरी चीज़ों को छोड़ना भी।

Sunday, 8 November 2015

हिंदी एक शानदार भाषा है पर मुझे लगता है की ये इंसान को काफी ज़्यादा बेहतर बना के व्यक्त करती है। शुद्ध हिंदी के साथ थोड़ी उर्दू, काफी अच्छी तरह घुल जाती है। मुझे अंग्रेजी पसंद है क्योंकि अंग्रेजी एकसार है। इसमें सब तुम हैं। न कोई आप, ना कोई तू। मुझे संस्कृत भी इसी लिए पसंद है। कभी कभी मुझे लगता है कि अगर सब संस्कृत बोलते तो सब एक दूसरे का सम्मान करते और मानवता का भेदभाव खत्म हो जाता। पर इंसानों की जाति के लिए ये कहने की बाते हैं।

हम आपसे बेइंतेहा मोहब्बत करते हैं। मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। मुझे तुमसे प्यार है। मैं तुझको चाहता हूँ। हिंदी में आप प्यार को हर पायदान पर चढ़ा और उतार सकते हैं।

हिंदी में दूसरों के लिए खुद से ज़्यादा इज़्ज़त नहीं है। मैं, मैं, और हम। तू, तुम और आप।

अपने आप को हिंदी में अभिव्यक्त करने में कुछ खतरे होते हैं। या तो आप हद से ज़्यादा ऊपर जा सकते हैं या हद से ज़्यादा नीचे जा सकते हैं। एक उपयुक्त जगह पाना थोडा कभी कभी थोडा मुश्किल हो जाता है।

मुझे बोलियाँ पसंद हैं। बिहार, हरियाणा और उसके बीच में उत्तर प्रदेश। साथ में हिमाचल का भाई जी। और कश्मीर की टूटी हिंदी। खड़ी बोली जिसमे इज्जत की थोड़ी कमी लगती है, और भोजपुरी जिसमे आप किसी को आसमान में बिठा सकते हो और किसी को पाताल में घुसा सकते हो। बीच में रोहिलखण्ड और दूसरी ओर बुंदेलखंडी, हिंदी का जवाब नहीं। घम्मघड़ी, कभी गोआ की तरफ भी जाना सायबा।

Saturday, 7 November 2015

रेलगाडियां और खूब सारे लोग अपनी अपनी मंज़िलों की ओर बढ़ते हुए। भारत एक अजीब सा देश है। हम बहुत ज़्यादा हैं, और हर चीज़ में बहुत ज़्यादा हैं। बाहरी हमें हमारे मसालों और साँपों से ज़्यादा पहचानते हैं। मुझे चीन बहुत पसंद है। चीन एक शानदार मुल्क है। और उसकी सभ्यता भी बहुत शानदार है। मुझे ब्रिटेन पसंद है। भारत अपनी शानदार चीज़ें खो रहा है पर ये अभी भी काफी शानदार है। कमान गलत लोगों के हाथों में है। छोटी जगहों की कमान पढ़े लिखे लोगों के हाथों में होनी चाहिए।

एक कलेक्टर के लिए पूरे ज़िले को सुधारना मुश्किल है। नेताओं के लिए अपने मंत्रालय के हिसाब से ज्ञान होना ज़रूरी होना चाहिए। कुर्सी और गद्दी की लड़ाइयों में जनता का नुकसान होता है। पर कहने वाली बात नहीं है कि जैसी जनता, वैसा नेता। नेता जनता से ही चुना जाता है, और अगर नेता भ्रष्ट है तो वो जनता का आइना है।

शिक्षा ही एक उपाय है। और साक्षरता शिक्षा नहीं है। शिक्षा मानवता सिखाती है पर इस विषय में पास होना आसान नहीं।

Competent Authority

You imagine a girl painting a picture of you as Tyler Durden from fight club. A pizza delivery boy goes to deliver a pizza at a whorehouse. ...