Wednesday, 18 December 2013

लफ़्ज़ों के मोती..

कुछ बातें मैं कहना चाहता हूँ
पर जैसे मेरे होठ सिले हों
उस धागे से
जो है रिश्तों की डोर
मैं कहता हूँ कुछ
और कहना चाहता कुछ और
लफ़्ज़ों को चाहता हूँ पिरोंना
उस रिश्तों की डोर में
लफ्ज़ जैसे मोती काले या सफ़ेद
मोती जो निकलें हैं दिल की सीपी से
जिनकी कीमत वैसे तो कुछ नहीं
पर तुम चाहो तो हैं वो अनमोल

Monday, 16 December 2013

रोग

कभी कभी सोचता हूँ
है क्या कोई इलाज
इस रोग का
जिसका नाम है ज़िंदगी
दर्द की अब तो है ऐसी आदत
हो गया है अब उसका भी नशा
घुटन भी अब ऐसी है
जैसे हो खुला आसमाँ
कभी कभी लगता है ऐसा
जैसे सांस लेना भूल गया
जिंदा हूँ अब भी मैं पर
खुद ही खुद से दूर गया
मौत ही लगती है इलाज
इस नामुराद रोग का
जिसका नाम है ज़िन्दगी
पर मैं रहना चाहता हूँ जिंदा
बीमारों के बीच एक बीमार
जब तक ज़िन्दगी खुद न कर दे रिहा

ठंडी घाटी

ठंडी सी उस घाटी में
रुका हुआ सा कारवाँ
मर्दों का एक झुण्ड
बर्फीली ज़मीन पर
ठण्ड की ठिठुरन
और हवाओ की चुभन
भेदता कानों को
वो गहरा सन्नाटा
हैं कुछ जांबाज़
जो लड़ते हैं कुदरत से
और कभी कभी खुद से
उस ठंडी सी घाटी में

Monday, 9 December 2013

उस चौड़ी सड़क के किनारे....

उस चौड़ी सड़क के किनारे
बसा एक यादों का घर
उलझी उलझी सी यादें
सुलझे सुलझे से सवाल
एक खोज उन जवाबों की
यादों के इस भवंर में
डूबती उतराते जवाब
चिढाते सताते और फिर मिल जाते
उस चौड़ी सड़क के किनारे

Sunday, 8 December 2013

शायरी

अश्कों में कैसे ढूंढॅ तुम्हें
जो गुम हैं इन आँखों से बरसो से

Wednesday, 4 December 2013

वह...

अनन्त में अटा हुआ
और शून्य से सटा हुआ
आरम्भ में और अंत में
फिर मध्य में बँटा हुआ

सम्पर्क में पर कटा हुआ
कर्म में डटा हुआ
अन्धकार में सूर्य वह
ग्रीष्म में घटा हुआ

पथ उसका हटा हुआ
काँटों से पटा हुआ
जड़ों से जुड़ा है वह
आनंद की जटा हुआ

Competent Authority

You imagine a girl painting a picture of you as Tyler Durden from fight club. A pizza delivery boy goes to deliver a pizza at a whorehouse. ...