कहानियां बहुत हैं। हर जगह देखो कहानियां ही कहानियां। बस कहने के लिए हिम्मत चाहिये जो सबके पास नहीं होती। दूसरे देशों की संस्कृतियां, वहां के किस्से, वहां की लोककथाएं। हमारे देश की लोककथाएं जिनको यूट्यूब पर घटिया एनीमेशन वीडिओज़ और 'नागिन गिन गिन गिन" जैसे म्यूजिक वीडिओज़ न सिर्फ लोगों के दिमाग से मिटा रहे हैं बल्कि उनकी जगह भी ले रहे हैं। काश कोई फ़िल्म स्टूडेंट, लोककथाओं और दादी नानी के किस्सों पर प्रोजेक्ट बनाता तो हर घर से कई कहानियां निकलतीं। दूसरे देशों के पास क्वालिटी है पर हमारे देशों के वीडिओज़ देख कर तो लगता है कि कम से कम सत्तर प्रतिशत वीडिओज़ में क्वालिटी भी नहीं। अपनी कहानियां हम सहेज रहे हैं या नहीं पता नहीं पर इंटरनेट पर भड़ास ज़रूर निकाल रहे हैं।
पहाड़ों पर जाओ वहां पर अलग कहानियां हैं। इतनी सारी कहानियां, देवों की, गंधर्वों की, किन्नरों की। पूरी अलग दुनिया है। देवों और दानवों के बीच युद्ध की कहानियां। राजाओं की कहानियां, भीलों की कहानियां, राज्यों की कहानियां। सारी कहानियां अब कहाँ चली गईं जो हम अब इंटरनेट पर या तो राजनीतिक लड़ाइयां लड़ते रहते हैं, या फिर शिकायतें करते रहते हैं। मनोरंजन के नाम पर फिल्मों की क्लिप्स या फिल्मी गानों पर नाचते युवा लड़के लड़कियों की क्लिप्स देखते रहते हैं। सृजन करने वाले लोग खामोश हैं। कोई बोल नहीं रहा।
आप नई दुनिया बनाना चाहते हैं। गंधर्वों की दुनिया जहां वो सुगंधित पुष्पों के बीच बैठ कर संगीत बजा रहे हैं और सुरा पी रहे हैं। आप दानवों की कहानियां लिखना चाहते हैं। आप चाहते हैं असुरों की कहानियां लिखें जहां असुरों के रीति रिवाजों के बारे में आप बताएं, ये बताएं कि सारे असुर बुरे लोग नहीं थे बस उनके रीति रिवाज अलग थे और देवों के साथ युद्ध के कारण सब असुर बदनाम हो गए। आप ये बताएं कि राक्षस कैसे होते थे, क्या राक्षस असुरों से अलग थे या उन्ही की एक प्रजाति थे। कितना कुछ है ना दिखाने और सुनाने के लिए। परन्तु हम शायद यही सुनना चाहते हैं 'इट्स बीन लांग तेरी बीन सुने परदेसी'।