खुद को समझाना कितना मुश्किल होता है ना। कई लोग खुद को समझाने की जगह दूसरों को समझाने या फिर क्रांति लाने चल पड़ते हैं। काली स्याह रातों में बैठ कर दूसरों के अनुभवों के बारे में सोचना। ये सोचना की अगर आपके जीवन ने कोई और मोड़ लिया होता तो फिर क्या होता। आपके सपने पूरे हो गए होते। फिर कुछ घटनाएं होती हैं और आपको पता चलता है कि अगर जीवन ने कोई और मोड़ भी लिया होता तो आपके सपने पूरे नहीं होते, और ये जान कर एक सुकून सा मिलता है।
जब घबराहट होती है तो मन भगवान की तरफ भागता है। लेकिन आप आसपास की दुनिया तो देखिए। अखबार ही पढ़ लीजिये। क्या अखबार पढ़ कर आपको लगता है कि भगवान है? फिर आपको लगता है कि भगवान का आविष्कार व्याकुल मन को दिलासा देने के लिए हुआ है। फिर भी जब आप रोज सूरज को उगता और डूबता देखते हैं, बारिश की ठंडी फुहारों को याद करते हैं, रात की शीतल चांदनी को महसूस करते हैं, अनगिनत तारों को देखते हैं तो खयाल आता है हो न हो भगवान अवश्य है। उनकी सृष्टि को शैतानों ने खराब कर रखा है और कई बार वो शैतान इंसानी रूप में होते हैं।
प्रकृति भी अजीब है, कभी आपने शेर को हिरण का शिकार करते देखा है? या फिर किसी मगरमच्छ को किसी शिकार को पानी में खींच कर दम घोंट कर मारते। टीवी पर ये सब अक्सर दिख जाता है और आप सोचते हैं कि भोले भाले घास फूस खाने वाले हिरण ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो शेर या मगरमच्छ का निवाला बन गया। प्रकृति भगवान ने बनाई, सुंदर सुगंधित फूल भगवान ने बनाये और फिर उन्होंने छिपकलियां, सांप और मच्छर बनाये। कितना अजीब है ना ये सब, और आपको इंसानी मामलों से ही फुरसत नहीं मिलती।
आपको छिपकलियां पसंद नहीं, सांप भी नहीं। आप बस सुगंधित फूलों के बीच रहना चाहते हैं। घने देवदार के पेड़ों के बीच एक कॉटेज चाहते हैं जहां आप एक फायरप्लेस के सामने बैठ कर कॉफी पीते हुए अपने मन का कुछ करना चाहते हैं। फिर आपको याद आता है कि दुनिया में किसी के सपनों में टाँग अड़ाने वाले लोग बहुत है। जब सपनों में टाँग अड़ जाती है तो फिर भगवान याद आते हैं। हर जगह जहां खूबसूरत कॉटेजेस बन सकते थे वहां मंदिर हैं क्योंकि सपनों में अड़ती हुई टाँग ऊपर से आ रही है या नीचे से ये पता नहीं। अब आप कॉटेजेस के सपने नहीं देखते, आप के लिए अब नीले आसमानी रंग की वैन बहुत है जिससे आप भगवान की बनाई दुनिया घूम सकते हैं। मंदिरों मे मानें या न मानें बादलों, वर्षा और घास पर गिरी हुई ओस की बूंदों को देख कर भगवान, या भगवान न सही, दुनिया को चलाती एक अदृश्य शक्ति पर विश्वास ज़रूर होता है।
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