Monday, 11 October 2010

भारी कलम





'एक और हरामजादा लटका'. लाल पेन से निशान लगाते  हुए मास्टर सूरजनाथ ने सोचा. मास्टर सूरजनाथ कि कलम सवर्ण छात्रों पर क़यामत ढा रही थी. बेचारे को पास होने के लिए सिर्फ एक अंक चाहिए था. लेकिन उसका नाम उसे ले डूबा, अंकित मिश्र. 'एक साल और पढ़िए मिश्र जी' चाय कि चुस्की लेते हुए मास्टर जी ने फिर सोचा. इस पूरी कॉपी जांचने कि प्रक्रिया  के दौरान एक भी सवर्ण उनके हाथ से नहीं बचा था.

उन्हें आज भी प्राइमरी  स्कूल के वो दिन याद हैं जब भीखू चमार का बेटा सरजू कक्षा में सबसे अलग किनारे टाट बिछा कर बैठता था. मास्टर छत्तर सिंह  ने सरजू का जीना मुहाल कर रखा था. एक तो मास्टर जी के सारे काम करो ऊपर से चमार कि उपाधि अलग से. कड़ी मेह्नत करने के बाद यही सरजू आज मास्टर सूरजनाथ बना था. अब उसकी बारी थी.

मास्टर जी चाय कि चुस्किय लेते हुए कॉपीयां जांचे जा रहे थे. आज उन्हें ज्यादा से ज्यादा कापियां जांचनी थी.  एक कॉपी खत्म कर के उन्होंने दूसरी कॉपी उठाई. पहला प्रश्न पिछड़ा शशक्तिकरण पर एक निबंध था. छात्र ने बहुत सुन्दरता से पिछड़ा वर्ग के शशक्तिकरण पर अपने विचार लिखे थे. मास्टर जी का दिल बाग बाग़ हो उठा था.  पूरी उत्तर पुस्तिका में एक भी गलती ढूँढे नहीं मिल रही थी.  मास्टर जी प्रसन्न हो उठे. अंक भरने क लिए उन्होंने मुख्य पृष्ठ पलटा. नाम लिखा था पृथ्वी सिंह. 'ठाकुर है साला' मास्टर जी ने सोचा. जी किया फेल कर दें. पेन उठाया पर पेन भारी लगने लगी. 'नहीं नहीं अच्छा छात्र है'. मास्टर जी ने पचास में पैंतीस नंबर दिए. आज पहली बार एक शिक्षक कि जीत हुई थी.

Saturday, 9 October 2010

काम का सामान


आखिरकार वह मेरी गिरफ्त में आ ही गयी. दंगों का असली फायदा तो ये ही होता है. उस घर में उसके साथ बस एक बूढ़ा था जिसका एक ही डंडे में काम तमाम हो गया था. अब इसकी बारी थी. लेकिन इतनी जवान और खूबसूरत लड़की को बेजा थोड़ी जाने देंगे! सोलह सत्रह बरस की होगी वो. हिरन सी डरी आँखें थी उसकी, काजल आँखों से बह कर गालों पर आ गया था.

मेरे पीछे चार और खड़े थे लाइन में. मैंने शलवार का नाडा खींच दिया. उसकी गुलाबी टाँगे घुटनों से काँप रही थी. हैरत की बात ये थी कि वह कुछ बोली नहीं, न चीखी न चिल्लाई. हम पाँचों ने बारी बारी से अपना काम पूरा किया. अब बारी थी उसको उसके खुदा के पास पहुचाने की.

तभी दरवाजा टूटा और दूसरी तरफ के बलवाई अन्दर आ गए. कुछ दर्दनाक लम्हों के बाद हमारा काम का सामान उसके हाथों में था.

Pesto Sauce

Living authentically is important. I didn't give shit to these new age wisdom kind of things earlier, but then in 2013 I started to have...