Saturday, 25 December 2010

फ़र्ज़



छोटी बच्ची  माँ की लाश के पास बैठी रो रही थी. माँ की आँखें उलट चुकी थी. आस पास और लाशें थी. चारो तरफ खून बिखरा था. आज 26/11/09 सी. एस. टी. स्टेशन पर रहने  का सबसे गलत दिन था.

आतंकवादी अभी भी बदहवास गोलियां चला रहे थे. मैं भी बाकी पुलिस वालों कि तरह दीवार की ओट में छुपा हुआ था. हमारी पुरानी 303 रायफल ने चलने से इनकार कर दिया था. मेरा एक बहादुर साथी जिसने अभी थोड़ी देर पहले बहादुरी दिखाई थी, सामने ज़मीन पर औंधे मुंह पड़ा था. गोली उसकी आँख से होती हुई उसके दिमाग से आर पार हो गयी थी.

मैं ओट से उस बच्ची को रोते हुए देख रहा था. लोग अभी भी भाग रहे थे. आतंकवादी अभी भी आराम से अपनी ए. के. 47 के शिकार चुन रहे थे. मेरा ज़मीर मुझे धिक्कार रहा था पर मैं कर भी क्या सकता था. 303 ले कर मैं ए. के. 47 का मुकाबला कैसे करता?

तभी मेरी नज़र मेरे मरे साथी के बगल में पड़ी पिस्टल पर पड़ी. मैंने फिर उस रोती बच्ची को देखा. उसे बचाना मेरा फ़र्ज़ था. गोलियों कि बौछार अभी भी जारी थी पर मुझसे रुका नहीं गया. मैंने झुक कर वो पिस्टल उठा ली. एक लम्बी सांस ले कर मैं प्लेटफ़ॉर्म कि तरफ भागा.

मुझे  दौड़ते हुए देख कर आतंकवादियों ने मुझ पैर गोलियां चलाना शुरू कर दिया . मैंने उनकी तरफ  दौड़ते हुए चार फायर किये. शायद उन दोनों में से एक को गोली लगी.

मैं बच्ची कि तरफ भाग रहा था तभी एक के बाद एक दो गोलियां मेरे सीने में लगी. मैं ज़मीन पर गिर गया. मेरे आस पास खून फैला था. मेरा अपना खून. मुझे अपनी बच्ची कि याद आई. मैंने अपना बटुआ निकला और उसकी तस्वीर देखी. मैं फ़र्ज़ निभाते  हुए अपनी जान दे रहा था, एक पुलिस वाले का फ़र्ज़. पर एक बाप के फ़र्ज़ का क्या? वो तो अब मैं कभी नहीं निभा पाऊंगा.

मैंने एक गहरी सांस ली और लेटे हुए अपनी मौत का इंतज़ार करने लगा. वो छोटी बच्ची अभी भी अपनी माँ की लाश के पास बैठी रो रही थी.

Saturday, 4 December 2010

प्यार.......



आज उसने मुझे मना कर दिया. एक लड़की सिर्फ एक लड़की जिससे मैंने प्यार किया उसी ने मुझे ठुकरा दिया. क्यों? मेरी क्लास में दूसरी पोजीशन है, सब मुझे पसंद करते हैं फिर मेरे में ऐसी क्या कमी रह गयी जो मैं उसे पसंद नहीं आया. उसे वो लफंगा पसंद है. उसे वो मुझसे बेहतर लगता है. कोई ऐसा किसी क साथ कैसे कर सकता है? कालेज के पहले दिन से मैं उससे प्यार करता हूँ. क्या क्या नहीं किया मैंने उसके लिए. ऐसा क्या चाहिए था उसे जो मेरे में नहीं था.

कितना प्यार करता हूँ उससे मैं. हँसते हुए कितनी सुंदर लगती है वो. उसकी हर हरकत, उसकी हर बात कितनी प्यारी लगती है. काश मैं कोई ऐसी मशीन बना पाता जो ये पता कर पाती कि उसके दिल में मेरे लिए क्या है. क्या फायदा इंजीनियर बन कर? मैं उसके बिना नहीं जी सकता. क्या खराबी थी मुझमें. भगवान् तूने मेरे साथ ऐसा क्यों किया.

अब मैं और जीना नहीं चाहता. उसके बिना तो बिलकुल नहीं. मैं इस ब्लेड से अपनी नस काट कर अपनी जान से दूंगा. आज फ्लैट में भी कोई नहीं है, अंशुमन भी नहीं. कोई बचाने भी नहीं आएगा. आह! खून! थोड़ी देर पड़ा रहूँगा तो और खून बहेगा. नहीं जीना मुझे उसके बिना.

मुझे चक्कर आ रहे हैं. मैं बोल भी नहीं पा रहा. कमजोरी से हिला तक नहीं जा रहा. क्या मैं सच में मर रहा हूँ? लेकिन क्या उस  पर  कोई फर्क पड़ेगा मेरे मरने का. वो फिर भी उसी लफंगे क साथ घूमेगी. उसे मेरे से प्यार नहीं है. उसे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं मरुँ या जियूं. 

रिया दीदी माँ बनने वाली हैं. मेरी दीदी माँ बनने वाली है. मैं मामा बनाने वाला हूँ. पापा मम्मी कि कितनी उम्मीदे हैं मेरे से. पापा लो तो मैंने बताया तक नहीं कि मेरा इंटेल में कैम्पस सेलेक्शन हुआ है. मैंने खुद ससे वादा किया था कि अपनी पहली कमाई मैं अपनी माँ क हाथ मैं रखूँगा. उस वादे का क्या? क्या मैं सच में मर रहा हूँ? क्या मैं सच में उस कुतिया  के लिए मर रहा हूँ? मैं अपने भांजे को नहीं देख पाऊंगा? नहीं मैं उसे देखना चाहता हूँ. मुझे पापा के सपने भी पूरे करने हैं. मैं उस कुतिया के लिए नहीं मर सकता. भगवान् मुझे बचा ले. उसे मेरे मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं मरना नहीं चाहता. भगवान..... बचा ले...... मैं मरना नहीं चाहता...... मैं जीना चाहता हूँ....... मैं जीना ..........

Competent Authority

You imagine a girl painting a picture of you as Tyler Durden from fight club. A pizza delivery boy goes to deliver a pizza at a whorehouse. ...