ज़िंदा रहने की ज़रूरतें. रोटी, कपडा, मकान, और थोड़ी सी और चीज़ें. लोग कीड़ो की तरह दुनिया में रेंगते रहते हैं, जब उनको ख़ुशी ख़ुशी साथ में रहना चाहिए था. इतिहास यही कहता है की लोग एक साथ खुश नहीं रह सकते, और रह सकते हैं तो ज़्यादा दिनों तक नहीं. लालच, और स्वार्थ, दुनिया इसके बल पर चल रही है. मैं अपनी दिल की बातें कहूँ या न कहूँ इसका कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि जिन लोगों के कहने से फर्क पड़ता है, वह कुछ नहीं कहते. हम पढ़ते हैं और दुनिया को एक अच्छी जगह बनाने के बारे में सोचते है, फिर हम धोखे खाते हैं, हमारा नुकसान होता है और हम सब कुछ भूल कर उस नुकसान की भरपाई में लग जाते हैं. हमारे समाज के लोग खुद के अलावा दूसरों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं. हम खुद भी ऐसा करते हैं. चीज़ों का न तो अंत है और न शुरुआत. मैं बिस्तर पर बैठा लिख रहा हूँ, क्यों? क्योंकि मुझे कुछ करने के लिए चाहिए. ऐसा कुछ जो मुझे खुद के खुद होने का एहसास दिलाता हो. मैं जब छोटा था, तब से मैं अपनी सारी ज़िम्मेदारियां निभा रहा हूँ. बीच में कुछ ऐसा हुआ जिसने मुझे एहसास कराया की आज तक जो भी चीज़ें मैं मानता आया था, वो सब गलत थीं. सच्चाई और झूठ का फर्क सामने आ गया और मैं खुद में ही अकेला रह गया.
मैंने कभी भी अपनी औकात से ज़्यादा पाना नहीं चाहा. और अगर कभी चाहा भी तो उसके लिए मैंने अपनी औकात बढ़ाई. वैसे दुनिया में ऐसा कोई नियम नहीं है, और ज़्यादातर लोग जो भी उन्हें पसंद आता है उसे छीन लेते हैं या धोखे से हासिल कर लेते हैं. पर मैंने लंबा रास्ता चुना, जिसकी वजह से मुझे दुश्वारियों का सामना करना पड़ा. खुशहाली के अपने रास्ते होते हैं. मैं खुशहाली से ज़्यादा सुकून पर यकीन रखता हूँ, क्योंकि यही एक चीज़ है जो आज तक नहीं मिली. नो रेस्ट फॉर विकेड, अंग्रेजी में कहते हैं, जो की गलत है. नो रेस्ट फॉर गुड हू डू विकेड ज़्यादा सही होगा. अंतरात्मा की आवाज़ सुनना ज़रूरी है. सही और गलत में फरक करना सबको नहीं आता क्योंकि फरक कभी कभी धुंधला हो जाता है. शैतानों की अंतरात्मा नहीं होती, ना ही जानवरों की होती है. जब शैतानों और जानवरों के बीच रहना हो तो अंतरात्मा से उम्मीदें बढ़ जाती है. योद्धा तैयार रहते हैं युद्ध के लिए, खुद के शैतान से और दुनिया के शैतानों से, पर जब कुदरत ये बताती है की शैतान भी कुदरत का हिस्सा हैं, और आपके जितने ही ज़रूरी हैं तो करने के लिए कुछ रह नहीं जाता. फिर आप अपना एक लक्ष्य बनाते हैं, और उसे पाने में लग जाते हैं.