अकेलापन बहुत कुछ सिखाता है। लोगों से मिलने जुलने की बजाय आप दुनिया के बारे में और जानने में समय लगाते हैं, ब्रह्मांड के रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। अलग अलग समाजों के नियमों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। वो भी एक तरीका है अपना जीवन जीने का। एडिसन ने बल्ब बना कर ख्याति और सफलता अर्जित कर ली और टेस्ला ने इतने आविष्कार कर के भी अकेले रहे और अंत में अकेले ही मृत्यु को प्राप्त हो गए। कारण सामाजिकता ही है। आज के समय की खास बात ये है कि आज हम इतने अधिक जुड़े हुए हैं कि कहीं न कहीं समाज मिल ही जाता है। कहीं नहीं तो इंटरनेट पर अपने जैसे लोग दिख ही जाते हैं और दिल को दिलासा मिलती है कि हम अकेले नहीं हैं।
जो लोग अपनी अच्छाई का फायदा नहीं उठवाना चाहते वो अकेलापन चुनते हैं। उन्हें घटिया लोगों द्वारा परेशान किया जाना पसंद नहीं। कभी कभी लोग आपसे बातें चुरा कर आपको ही बताते हैं। परेशान करने वाली बात है खासकर कलाकारों के लिए। असली कलाकार प्रभावित होते हैं, चुराते नहीं। लेकिन आजकल चुराने का चलन काफी हो गया है। असली कलाकारों से चोरी कर के लोग अमीर होते जाते हैं और असली कलाकार गुमनामी की मौत मर जाते हैं। ये चेहरा भी समाज का है। ये सब होते हुए भी समाज के खुशनुमा चेहरे भी हैं, जैसे लोगों के इकट्ठा होने और जश्न मनाने के समय की खुशी। आग के इर्दगिर्द बैठ कर गिटार पर गाने सुनते हुए, कुछ खाते हुए पर्वत की ठंडी हवा का आनंद लेना। ये समाज के खुशनुमा चेहरे हैं। समाज के बदनुमा चेहरे को देख कर हतोत्साहित होने की जगह खुशनुमा चेहरे पर फोकस किया जा सकता है। पहाड़ों की यात्रा की जा सकती है, अपने जैसे लोगों को देख कर खुश हुआ जा सकता है और लोगों की मदद की जा सकती है। आज के ज़माने की खास बात ये है कि आज के ज़माने में टेस्ला गुमनामी की मौत नहीं मरा करते, उनके नाम की महंगी इलेक्ट्रिक कार्स होती हैं।
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