Thursday, 7 April 2022

गुमनामी

 समाज बेहद ज़रूरी होता है। आप हमेशा से समाज का हिस्सा बनना चाहते थे। जिस समाज में जाएं वहां का हिस्सा बनने की कोशिश। इंसानों के तौर पर हमारी सुरक्षा सामाजिक होने पर ही है इसके नुकसान भी हैं पर ये नुकसान तब कम हो जाते हैं जब आप सामाजिक नियमों का पालन करें। समाज का हिस्सा न बन पाने के कारण जो दुख होता है उसको शब्दों में बयान कर पाना मुश्किल है। असामाजिक और सामाजिक न होने में अंतर है। कभी कभी सामाजिक होने के बावजूद आप बहुत सामाजिक नहीं रह पाते क्योंकि आप स्वयं को समाज से दूर कर लेते हैं लेकिन अगर उस खाली समय का आपने अपना कौशल बढ़ाने में प्रयोग किया है तो वो समय बेकार नहीं जाता। आप हमेशा उनको धन्यवाद देते हैं जिन्होंने आपका मुश्किल वक्त में जाने अनजाने साथ दिया। भय के कारण अवेयरनेस आ जाती है। कभी कभी भय के कारण व्यक्ति उग्र भी हो जाता है और कभी कभी उस उग्रता का प्रयोग कला के लिए होता है। कुछ कलाएं असामाजिक होती हैं, या फिर कुछ कलाएं समाज की ऐसी चीजों का उपहास करती हैं जो उपहास उड़ाने के योग्य हैं। आपको ये सब नहीं करना था, आपके लिए कला बस अपनी उग्रता व्यक्त करने का माध्यम था। जब अधिक अवेयर हो जाते हैं तो समाज की त्रुटियां देख कर क्रोध आना लाज़िमी है। 

अकेलापन बहुत कुछ सिखाता है। लोगों से मिलने जुलने की बजाय आप दुनिया के बारे में और जानने में समय लगाते हैं, ब्रह्मांड के रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। अलग अलग समाजों के नियमों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। वो भी एक तरीका है अपना जीवन जीने का। एडिसन ने बल्ब बना कर ख्याति और सफलता अर्जित कर ली और टेस्ला ने इतने आविष्कार कर के भी अकेले रहे और अंत में अकेले ही मृत्यु को प्राप्त हो गए। कारण सामाजिकता ही है। आज के समय की खास बात ये है कि आज हम इतने अधिक जुड़े हुए हैं कि कहीं न कहीं समाज मिल ही जाता है। कहीं नहीं तो इंटरनेट पर अपने जैसे लोग दिख ही जाते हैं और दिल को दिलासा मिलती है कि हम अकेले नहीं हैं। 

जो लोग अपनी अच्छाई का फायदा नहीं उठवाना चाहते वो अकेलापन चुनते हैं। उन्हें घटिया लोगों द्वारा परेशान किया जाना पसंद नहीं। कभी कभी लोग आपसे बातें चुरा कर आपको ही बताते हैं। परेशान करने वाली बात है खासकर कलाकारों के लिए। असली कलाकार प्रभावित होते हैं, चुराते नहीं। लेकिन आजकल चुराने का चलन काफी हो गया है। असली कलाकारों से चोरी कर के लोग अमीर होते जाते हैं और असली कलाकार गुमनामी की मौत मर जाते हैं। ये चेहरा भी समाज का है। ये सब होते हुए भी समाज के खुशनुमा चेहरे भी हैं, जैसे लोगों के इकट्ठा होने और जश्न मनाने के समय की खुशी। आग के इर्दगिर्द बैठ कर गिटार पर गाने सुनते हुए, कुछ खाते हुए पर्वत की ठंडी हवा का आनंद लेना। ये समाज के खुशनुमा चेहरे हैं। समाज के बदनुमा चेहरे को देख कर हतोत्साहित होने की जगह खुशनुमा चेहरे पर फोकस किया जा सकता है। पहाड़ों की यात्रा की जा सकती है, अपने जैसे लोगों को देख कर खुश हुआ जा सकता है और लोगों की मदद की जा सकती है। आज के ज़माने की खास बात ये है कि आज के ज़माने में टेस्ला गुमनामी की मौत नहीं मरा करते, उनके नाम की महंगी इलेक्ट्रिक कार्स होती हैं।  

No comments:

Post a Comment

उफान

सपने टूटते हैं  तो दिल टूट जाता है, दर्द का दरिया उमड़ता है कभी, कभी गुस्से का उफान, खालीपन सा घर कर लेता है  सीने में और फिर हम फिर उस खालीप...