Friday, 22 May 2026

ज़रिया

अंधेरे को चीरती रौशनी की एक किरण
दिल में उठी उम्मीदों की लहर
देर हुई पर आए दुरुस्त हैं
दर्द का कर्ज चुका एक मुश्त है
लगता है जैसे रौशन हुई ये दुनिया
जैसे अधूरे कामों का था मैं ज़रिया

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