Friday, 22 May 2026

सब्र

कई बार जब हम कुछ खोते हैं
तब कुछ पाते हैं
खोया पाया का खेल है
जीवन सुख दुख का मेल है

कुछ पा के कुछ खोया है
सब्र का बीज बोया है
फल की उम्मीद नहीं
मिल जाये तो जीत वही

प्रेम के बीज भी बोये हैं
कुछ पंछी अभी भी सोये हैं
पेड़ों पर उनका रैन बसेरा है
अब कुछ देर है फिर सवेरा है

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