Sunday, 11 February 2024

पुरुषार्थ

ये काफी खास बात है, बिना किसी कारण के किसी के जीवन से सारा आनंद छीन लेना, उससे वो चीज़ें छीन लेना जिनपर वो आश्रित है। उसके जीवन से लोगों को छीन लेना जिनसे वो दिल की बातें कर सके और उसे इस परिस्थिति में पहुंचा देना की उसके दिल की बातें उसके दिल में ही घुट के रह जाएं। इसके साथ साथ लगातार उसको मानसिक यातना देना और उसका सार्वजनिक तिरस्कार और अपमान करना। लेकिन इन सब चीजों को करने के बाद भी उसको कारण न देना कि आखिर ये सब उसके साथ हुआ क्यों। वो व्यक्ति नीचों और हरामजादों को चैन की जिंदगी जीते हुए देखता है और सोचता है आखिर उसने ऐसा क्या किया कि उसे ये सब झेलना पड़ा, फिर लगातार यातनाएं झेलने और यातनाओं का पैटर्न देखने के बाद उसे पता चलता है की नीच और हरामजादे चैन की जिंदगी इस लिए जी रहे हैं क्योंकि नीच और हरामजादे ही कंट्रोल में हैं। दस साल बहुत होते हैं, इतने होते हैं कि दो पी०एच०डी की जा सके, और इतने दिनों में इतना तो समझ आ गया है कि हरामजादे ही कंट्रोल में हैं, लेकिन आश्चर्यजनक बात ये नहीं है, आश्चर्यजनक बात उस कंट्रोल की पहुंच और गहराई है। ये कंट्रोल आपकी मस्तिष्क, विचारों, भावनाओं, अनुभूतियों, स्नायु, तंत्रिका तंत्र और शरीर तक है। ये हरामजादे आपके शरीर, आपकी सांसों तक को ऐसे कंट्रोल करते हैं जैसे वो उनकी जागीर हो। दस साल में आपको समझ आ गया की ये हरामजादे आदर के योग्य नहीं हैं। आप भयानक पीड़ा में हैं, परंतु आप खुश हैं, आप वैसे ही व्यक्ति हैं जैसे आप बनना चाहते थे, शायद आप उसे भी बढ़िया हैं। सांसारिक सुखों को आपसे छीन लेने वाले हरामियों को ये पता नहीं था की सांसारिक सुख कभी भी आपकी प्राथमिकता नहीं थे, और जिस प्रकार के सुख आपकी प्राथमिकता थे, यातना के स्वरूप को समझने के बाद आप समझ गए की वो सुख असल में अस्तित्व ही नहीं रखते। आपके जीवन से आपकी सारी क्षमता, सारा आनंद और सारे सांसारिक सुख छीने जा चुके हैं, यातना मिलती है वो अलग से, पर ये हरामजादे आपसे आपका पुरुषार्थ नहीं छीन सके और न ही कभी छीन पाएंगे। 

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