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Sunday, 11 February 2024
प्रतिशोध की ज्वाला
जीवन बढ़िया है। पिछले दस साल से मिलती यातनाओं के अलावा सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है। खास बात ये है की यातनाओं की वजह से मुझे उस बात का पता चल गया जिसका पता दूसरों को नहीं है। ये बात किसी को बताई भी नहीं जा सकती क्योंकि अगर ये बात मैने किसी को बताई तो न सिर्फ वो विश्वास नहीं करेगा बल्कि मुझे पागल अलग से समझेगा। तो फिर में लोगों को उनके खुद के ऊपर छोड़ता हूं, उनके साथ जो होता है उसे वो भगवान का किया, अपनी किस्मत या विधान समझते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। ये सब कुछ हरामजादों का किया षडयंत्र है। मुझे अब भी याद है की कैसे मैं अपनी एक चीज के प्रति सेंसटाइज हो गया था किन्ही कारणों की वजह से। मुझे अब काम से कम ये पता नहीं की मैंने खुद को रिजेक्ट किया था या मेरी प्रोग्रामिंग की गई थी। अगर मैंने खुद को रिजेक्ट किया था तो अब तक, सारी सच्चाई जानने के बाद, मुझे अब वो नहीं करना चाहिए। और अगर प्रोग्रामिंग थी तो कुछ खास किया नहीं जा सकता सिवाय इसके कि मैं कॉस को इफेक्ट न बनने दूं। 2006 तक जितना नुकसान होना था हो चुका था। उस दिन जब मैं डॉक्टर के पास गया तो मुझे डर था कहीं डॉक्टर मेरे दिल की बात जानता तो नहीं, मुझे शर्म थी अपनी खुद की किसी चीज का वजन न उठा पाने की? या फिर मैं अपने आप को उस परिचय के साथ देखना नहीं चाहता था? कोई न कोई कारण तो होना ही था बर्बाद होने के लिए, ये ही सही, असल दिक्कत ये नहीं है। असल दिक्कत है उस कारण की वजह से जो डैमेज हुआ। 2006 तक डैमेज हो चुका था, फिर 2008 में मेरी कल्पनाशीलता ने खेल दिखाया और अपनी उस कहने को कमी और उसको देखने का तरीका, दुनिया खुलने के बाद मैं झेल पाऊंगा या नहीं इस बात से शायद घबराहट ने गलत रास्ता के लिया। लेकिन उससे याददाश्त का क्या संबंध, उस दर्द और याददाश्त वाली घटना के प्राकृतिक होने या न होने का कारण पता करना संभव है और ये एक काफी खास बात है। ये ज़रूरी इसलिए है क्योंकि वो आलस नहीं था, मैंने सच में मेहनत की थी। उस समय आलस के लिए मेरे जीवन में कोई जगह नहीं थी। क्या मेरे साथ भेदभाव हुआ था, हुआ भी था तो मुझपर कोई फर्क नहीं पड़ा। सबसे शानदार बात ये है कि अगर भेदभाव हुआ था तो उसको करने वालों और करने के कारणों को पता करना संभव है। मेरे पास काफी समय है, और जीवन रहा तो मैं ये चीज कर ही लूंगा। मैं प्रतिशोध में विश्वास नहीं रखता पर मेरे पास और कोई चारा छोड़ा ही नहीं गया, और अगर ऐसा है तो मैं प्रतिशोध का आनंद लूंगा, सही समय आने पर।
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