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Sunday, 11 February 2024
हरामजादे
जो मैं जानता हूं क्या वो जानने के बाद फूलों से खुशबू आना बंद हो जाएगी? नहीं। दुनिया खूबसूरत हो सकती थी पर है नहीं। अधीनता में दुनिया कभी खूबसूरत नहीं हो सकती। प्रकृति फिर भी सुंदर है, देखने का नजरिया चाहिए। कुछ भी तो नहीं बचा। सब खत्म हो गया। इंसानों को जानवरों से भी बदतर बना दिया गया है। नकली वाइब्स पर हाई हरामजादे लोगों का शोषण कर रहे हैं और लोग वैसा जीवन भी नहीं जी पा रहे जैसा वो जी सकते हैं। प्रकृति की सुंदरता को कोई सराहे भी तो कैसे जब कोई उन्हे जान बूझ कर भूखा मार रहा हो या अपने मजे के लिए प्रताड़ित कर रहा हो। सच सच होता है, और सच यही है कि शांतिप्रिय लोगों के लिए दुनिया में कुछ बचा नहीं, हां बस उन्हे इस चीज का व्यक्तिगत अनुभव होना चाहिए। कही सुनी बातों पर विश्वास करने का कोई फायदा नहीं। मैं अपनी वाइब्स की सुरक्षा करूंगा। जो चीज़ें मुझे पसंद हैं मैं उनकी सुरक्षा करूंगा। कल्पनाशीलता का कोई काम नहीं रह गया जब कुछ नीच हरामजादे आपको ऐसा महसूस कराएं की चौबीस साल तक मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक दर्द झेलने के बाद भी आप अपना स्वयं का जीवन भी डिजर्व नहीं करते। इनकी हरमजदगी की कोई सीमा नहीं है, और एक बार आप इनकी हरमजदगी के बारे में जान गए तो फिर इसका असर आप पर होना बंद हो जाता है। असली सच आपके सामने है और जो पर्दा था वो उठ चुका है। ये हरामी ये सोचते हैं की इनके दिमाग में जो आपकी छवि है आप को ये वो बनाएंगे। इन हरामजादों के इनके दिमाग में आपकी ये छवि होने का कारण क्या है, क्या वो कारण वैध है, आप बस ये जानना चाहते हैं। और प्रसन्नता की बात ये है की ये जानने की तकनीक दुनिया में मौजूद है। कारण वैध है तो कोई दिक्कत नहीं और अगर नहीं है तो आप इन हरामजादों को जिंदा जलाएंगे। फूलों की खुशबू सूंघने से अब कोई फायदा नहीं है। ये हरामजादे बस साबुन बेचने, यातना देने के लिए और बलात्कार करने के लिए जीवित हैं, और ये करने के लिए ये लोगों ये झूठी नैतिकता का बहाना देते हैं ताकि जब ये लोगों का बलात्कार करें तो लोग इनका विरोध न कर सकें। बलात्कार करने पर कारण देने पर विरोध न करना, ऐसा तो वही व्यक्ति कर सकता हो जो आदर्शवादी हो, जो नियमों पर भरोसा करता हो। तो मामला साफ है ये मादरचोद अच्छे लोगों का शोषण कर के ही अपनी ताकत को बनाए रखते हैं। चूंकि ये मामला तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क से जुड़ा है, व्यक्ति बेबस है, क्योंकि इससे गहरा कुछ नही हो सकता, किसी विरोध की गुंजाइश ही नहीं है।
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