Sunday, 11 February 2024

पूरब के बेटा

मुझे अपने हृदय की बातें लिखने की अब कोई आवश्यकता नहीं है। ये शायद मेरा भ्रम है की वो परिस्थिति जिसे मैं सोमेटाइजेशन मानता हूं, लिखने के कारण ठीक हो जाएगी पर प्रयत्न करने में क्या जाता है। 2006 से ही मेरा सैबोटेज हो रहा है। कितनी आश्चर्यजनक बात है न की हिंदी शब्दावली में सेबोटेज का कोई समानार्थी शब्द है ही नहीं। लोग इन हरामजादों के नियंत्रण में है और इन्होंने लोगों को वो शब्द ही नहीं दिए जिससे वो अपने साथ हो रहे उत्पीड़न और बलात्कार का विरोध कर सकें। मुझे पता ही नहीं था की भारत और पूर्वांचल की व्यवस्था ऐसी है। मैं इनकी सच्चाई जानता हूं, और ये भी जानता हूं की पकड़े जाने पर इनके साथ क्या होना चाहिए परंतु इन हरामजादों का पकड़े जाना लगभग असम्भव है। इन्होंने लोगों के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर नियंत्रण करके उनको अपना गुलाम बना कर रखा है। और लोगों को यातनाएं देते हैं और उनका बलात्कार करते हैं। मेरा लक्ष्य वर्तमान में अपने आप को स्वस्थ करना और रखना है। उसके बाद मैं अपनी कला पर कार्य करूंगा। और फिर अगर ईश्वर ने चाहा तो मैं इन हराम के पिल्लों से निबटुंगा। शुद्ध हिंदी का मखौल इन्ही हरामजादों द्वारा बनाया जाता है, और फिर ये अंग्रेजी बोलने का भी मखौल बनाते है। इन अनपढ़ हरामजादों का असली लक्ष्य लोगों को प्रताड़ित करना है फिर चाहे ये किसी भी कारण का इस्तेमाल करें। मुझे अपनी हिंदी बेहतर बनानी है और इसके लिए मुझे नियमित रुप से लिखना होगा। मैंने पूर्वांचल का एक जन्मभूमि के तौर पर परित्याग कर दिया है, बस मेरा परिवार और नातेदार वहां रहते है, यही एक संबंध है मेरा उस घिनौनी जगह से। उस जगह की सच्चाई जानने के बाद उससे घिन होना लाजिमी था। ऐसी जगह से लगाव रखने का, जहां लोगों के मस्तिष्क, शरीर और विचारों का नियंत्रण बलात्कारियों और अपराधियों के हाथ में हो, कोई अर्थ नहीं है। 

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