Wednesday, 16 March 2022

खरोष्ठी, कैथी, मोदी और शारदा लिपियाँ और Woke और Enlightened का अंतर

Dec 3/2020

भारत में कई लिपियाँ हैं, और कई लिपियाँ विलुप्त हो चुकी हैं। देवनागरी लिपि का प्रयोग लगभग पूरे उत्तर भारत में होता है। अरबी और पर्शियन लिपि का उपयोग भारत में एक समुदाय अधिक करता है और अधिकतर जनता ये लिपियाँ न जानने के अभाव में ये जानने से वंचित रह जाती हैं कि जो अखबार इन लिपियों में खबर छापते हैं वो क्या कह रहे हैं। भारत की कई लिपियाँ अब विलुप्त हो चुकी हैं जैसे खरोष्ठी, कैथी, मोदी और शारदा। लिपियाँ इस लिए आवश्यक हैं क्योंकि बच्चे लिपियों के द्वारा ही शिक्षा पाते हैं।

कई बार अपनी local भाषा के कारण उनको तुच्छ समझा जाता है, लेकिन लिपि उस भाषा को पहचान देती है, और फिर किसी दूसरे के उसे तुच्छ समझने से फर्क नहीं पड़ता।

भारत में सरकारी कार्यों के लिए पर्शियन का प्रयोग हो सकता है लेकिन शारदा और खरोष्ठी जैसी लिपियाँ प्रयोग से बाहर हो जाती हैं।

भाषा की बात करें तो मैंने संस्कृत स्कूल में पढ़ी थी, मैं धर्म ग्रंथ पढ़ने के लिए proper संस्कृत सीखना चाहता था लेकिन मैं स्वयं को उस लायक नहीं समझता। रोमन लिपि लिखने में आसान है, खासकर electronic devices पर तो इससे काम चल जाता है।

Electronic education का ही कमाल है कि आजकल की युवा जनता woke हो चुकी है, मैं पहले शब्दों के चयन पर विश्वास नहीं करता था क्योंकि मुझे लगता था कि भावनाओं से काम चल जाएगा, लेकिन जैसे जैसे उम्र (आयु) बढ़ी, ये समझ आया कि शब्दों सही चयन बहुत आवश्यक है, तब भी जब आप कोई celebrity न हों। मुझे woke होने में कोई बुराई नहीं लगती लेकिन कभी कभी ये ज़्यादा हो जाता है। जैसे लिंग परिवर्तन करवाना, मैं समझ सकता हूँ कि जो लिंग परिवर्तन करवाते हैं वो क्यों करवाते हैं क्योंकि मेरी संस्कृति में भी ‘लवंडा’ और ‘मउगड़ा’ प्रथा चली आ रही है, लेकिन अगर कोई पुरुष स्त्री जैसा महसूस करे तो वो स्त्री वेश में रहे जैसा कि आजतक भारत में चला आ रहा है। लेकिन मैं ज़्यादा नहीं कहूंगा क्योंकि मेरे favourite Hollywood directors Wachowskis ने भी लिंग परिवर्तन करवाया है। मेरा अपना मानना है कि ईश्वर या प्रकृति, जिसमें भी आप मानते हैं, ने आपको लिंग दिया है आप उसका धर्म निभाइये, लेकिन जा के पैर न फटे बिवाई वो क्या जाने पीर पराई। प्राकृतिक transgenders से मेरी पूरी सहानुभूति है। समाज अलग लोगों पर कठोर होता है। मैं woke हूँ पर मेरा woke, enlightenment की तरफ वाला अधिक है। आवश्यकता से अधिक woke militant हो जाता है लेकिन enlightened व्यक्ति संतुलन बनाये रखने का प्रयत्न करता है।

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