Wednesday, 16 March 2022

सन्यासी, साधु, स्वामी, नाविक, यांत्रिक और तांत्रिक

Dec 3/2020

समाचारों में जब भी किसी तांत्रिक के बारे में पढ़ने को मिलता है, कई बार वो मुस्लिम निकलता है। इसमें कोई बुराई नहीं है अगर वो व्यक्ति सच में तांत्रिक हो। हम तंत्रों से घिरे हुए हैं, जनतंत्र, संचारतंत्र, प्रजातंत्र आदि। भारत में कई बार सड़क पर निकलने पर आपको टोटके दिख जाएंगे। भारतीय महिलाएं अपने बच्चों को बचाने के लिए कितने यत्न करती हैं। भारत में धर्मशास्त्रों और रीति रिवाजों के अतिरिक्त तंत्र विद्या भी है। अगर तंत्र विद्या सच में है, तो मुझे लगता है कि उसका उपयोग केवल आत्मरक्षा में करना उचित होगा। मुझे लगता है कि कई बार तथाकथित मुस्लिम ‘तांत्रिकों’ को तांत्रिक कहना उचित नहीं होगा।

साधु शब्द का अर्थ ‘सज्जनता’ के निकट है पर कई बार परिस्थितियों के तंत्र में उलझ कर वो कितना भी चाहते हुए सज्जन नहीं रह पाता। फिर भी साधु तो साधु होता है। मेरे मन में सच्चे सन्यासियों और साधुओं के प्रति बहुत आदर और श्रद्धा है। मैं उतना धार्मिक न होने के कारण यांत्रिकों में विश्वास रखता हूँ लेकिन ISRO के अतिरिक्त अन्य यांत्रिकों ने अधिकतर निराश ही किया है।

सज्जनता और सज्जन पुरुष मुझे बहुत प्रिय हैं लेकिन मेरा व्यवहार नाविकों की तरह होने के कारण मैं उनसे दूर ही रहने का प्रयत्न करता हूँ।

भारत में कई प्रकार के सम्प्रदाय हैं, कश्मीर शैव उनमें से एक है। मुझे स्वर्ण मंदिर में जितनी शांति मिलती है उतनी ही शांति कश्मीर शैव, मंदिरों मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय मंदिरों, बौद्ध स्तूपों और नाथ सम्प्रदाय के बारे में पढ़ कर मिलती है। यहां “यही तो खूबसूरती है इस देश की साहिब” कहना एकदम उचित होगा।

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