Wednesday, 16 March 2022

खून, ज़मीन या मज़हब?

Oct 21/2020

भारत, विविधता का देश, धर्म का देश। विश्व में जेनेटिक समानता और विभिन्नता बहुत है। भारत और पाकिस्तान में जेनेटिक समानता है, पाकिस्तान और ईरान, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में जेनेटिक समानता है, मंगोलिया और तुर्की में जेनेटिक समानता है, नेपाल और तिब्बत में जेनेटिक समानता है।

हम अपना प्रकार ढूंढते हैं, अपना प्रकार और अपने से थोड़ा सा भिन्न। कभी कभी कोई काफी कुछ अपने जैसा हो तो उससे चिढ़ भी होती है। कोई बहुत अलग हो तो विस्मय या कभी कभी घृणा भी हो सकती है।

यहां पर मज़हब कहाँ आता है? मज़हब तब आता है जब हम दूसरे का genocide करने पर उतर आते हैं।

याद है, पाकिस्तानियों ने क्या किया था बांग्लादेश में? Genocidal rape, न जाने कितनी महिलाओं का। जो लोग ये मान कर की अल्लाह को सिर्फ अरबी भाषा आती है, अल्लाह का अपमान कर सकते हैं, उनके लिए किसी की संस्कृति का अपमान करना कितना कठिन है? अल्लाह में मानो, ठीक है, अपने नियम भी मानो, ठीक है, पर दूसरों को तो उनके नियम मानने दो। कहते हैं ना, नया मुल्ला ज़्यादा बांग देता है। अरबी तसल्ली से रहते हैं, अपने वतन का विकास करते हैं, अपने नियम मानते हैं, वहीं पाकिस्तान अपना इतिहास भी झुठलाने पर तुला हुआ है।

बड़े लोगों में purity वाला हिसाब बहुत होता है। genetic makeup का फर्क बहुत होता है, विडम्बना की बात है ना कि मैंने पढ़ा था कि हिटलर में यहूदी खून भी था, ऐसा व्यक्ति जो आर्यन supremacy मानने वाला था। बहुत ज़्यादा आज़ादी ज़रूरी नहीं परन्तु इतनी तो होनी ही चाहिए की अपने प्रकार के लोगों से खुल कर मिलजुल सकें, लेकिन यहीं पर आ जाता है मज़हब, और उससे ज़्यादा मज़हब का ग़लत इस्तेमाल करने वाले लोग। बंगालियों का genocide कर के क्या मिला? पूरे विश्व को इस्लामिक कर के क्या मिलेगा? विविधता में क्या बुराई है? छोटे communes में क्या बुराई है? विकास के लिए ज़रूरी पूंजीवाद या capitalism में क्या बुराई है? समाज का खयाल रखने वाली socialist सरकार में क्या बुराई है? क्या balance सिर्फ Thanos के तरीके का होना आवश्यक है? सामंजस्य और सद्भावना में क्या बुराई है?

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