Oct 23/2020
आजकल की युवा पीढ़ी में बिल्ली पालने का चलन है। मुझे बिल्लियां कुछ खास पसंद नहीं लेकिन अगर कभी पाली तो नाम सोच कर रखा हुआ है, “नेफेरतीति”। मुझे कुत्तों से खास लगाव है। मेरे परिवार में कुत्ते पाले गए, लेकिन बड़े होने के बाद आपको लगता है कि आपके पर्सनल कुत्ते भी होने चाहिए। कुत्ते वफादार होते हैं, आपकी सुरक्षा करते हैं। अगर मैंने कुत्ते पाले तो उनका नाम होगा “Hitler” और “Babar”.
मुझे लगता है कि कुत्ते पालना इंसान पालने से ज़्यादा बेहतर है। मैं काफी दिनों से शाकाहार का पालन कर रहा हूँ, सामान्यतः मैं शाकाहारी ही हूँ लेकिन कभी कभी मांसाहार का मन करता है, खासकर poultry. मछली कभी कभी ही खाना पसंद है, freshwater या seawater ये बनाने वाले पर निर्भर करता है।
बिल्लियां वफादार नहीं होती, लेकिन वो आपसे वफादारी मांगती हैं। मेरे विचार से वफादारी two way street है, और one way street तब है जब आप किसी के नौकर या retainer हों। इसमें भी कई बातें आती हैं, और अच्छा मालिक अपने retainer का खयाल रखता है।
गौसेवा आवश्यक क्यों है? क्योंकि आप गाय के बच्चे का दूध पी लेते हैं। अगर पैसे से दूध खरीद रहे हैं तो कोई बात नहीं लेकिन अगर आप बीफ खाते हैं (जो कि सांस्कृतिक और culinary preference है) तो (अगर आप भारतीय हैं तो) कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि सोशल मीडिया पर चीख चीख कर ये ना बताएं कि बीफ कितनी अच्छी चीज़ है (western preferences अलग हैं, और उनके लिए नार्मल बात है, साथ ही (कइयों में) सालों का colonization का arrogance भी है), जो कि अज्ञानता या संयम की कमी से आता है। मैं संयम की कमी के लिए कभी किसी को दोष नहीं देता क्योंकि संयम या धैर्य की समस्या को मैंने स्वयं भुगता है)।
भारत में दो किस्म के ब्राह्मण पाए जाते हैं, सरकारी ब्राह्मण और जाति के ब्राह्मण। धार्मिक ब्राह्मण इन दोनों में होते हैं, जो अपने ब्राह्मण होने का कर्तव्य निभाते हैं आचार और विचार दोनों से।
कुछ सिर्फ जाति के ब्राह्मण होते हैं, जिनको आदर तो पूरा चाहिए लेकिन कार्य बस दूसरों का शोषण और entitlement रखना है। entitlement हर बार वैधानिक हो सकता है, जब विधि ही आपके हाथ में हो।
“अहिर, गड़रिया, कुनबी, चोर
धय सारे की टंगड़ी तोड़”
इनके कई सिद्धांतो में से एक है, जिसका सही interpretation ये स्वयं भी नहीं कर पाते।
अफसोस, येशु मसीह भी गड़रिये ही थे।
कभी कभी आप किसी से प्यार करते हैं तो आपको उनके भी कुत्ते पालने पड़ते हैं। और एक बात तो मैं बिल्कुल कह सकता हूँ कि dog handling आसान काम बिल्कुल नहीं है, especially तब जब आपको जानवरों से डर लगता हो, भले ही आपको कुत्तों की वफादारी कितनी ही पसंद हो।
An archive of my writings and a place for my writing experiments and projects.
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