Wednesday, 16 March 2022

रात्रि भी सुंदर हो सकती है और कुछ और बातें

Nov 14/2020

India में nightlife कम ही जगह देखने को मिलती है। एक जगह जहां nightlife देखने को मिलती है वो है Goa. रात्रि को ज़्यादातर negative रूप में ही देखा जाता है। लेकिन हम भूल जाते हैं कि येशु मसीह का जन्म, श्री कृष्ण का जन्म भी रात्रि में हुआ था। हर जगह रात्रि विश्राम का निर्धारित समय होता है लेकिन कुछ लोग निशाचर होते हैं। जंगल में रात्रि predators के शिकार का समय होता है, इंसानी predators और जानवरों में यही अंतर होता है कि जानवर need based शिकार करते है, वहीं इंसान पर ये बात हर बार लागू नहीं होती। वैसे इंसानी निशाचर predator ही हो कोई ज़रूरी नहीं है।

कई भारतीय संस्कृतियों में दिव्यता को personify किया जाता है। यहां तक कि कई जगहों पर small pox और chicken pox जैसी बीमारियों को भी माता का प्रकोप माना जाता है। सोचिये, जो लोग रोगों को भी माँ का प्रकोप मान कर उससे उबरने के लिए सविनय निवेदन करते हैं उनको colonize करने की कोशिश करने वाला कितना, असंसदीय शब्दों के लिए क्षमा करियेगा, gigantic asshole, होगा। मुझे British संस्कृति पसंद है, इंडिया में अभी भी ये पॉश संस्कृति के रूप में कायम है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं भूल गया कि एक समय पर, मैं generalize नहीं करूंगा, कुछ लोग “Dogs and Indians not allowed” के बोर्ड लगाया करते थे।

खैर हम रात्रि की बात कर रहे थे। रात्रि को हर बार negatively देखना आवश्यक नहीं। रात्रि आराम करने का समय तो होती ही है, साथ ही कभी कभी enjoy करने का समय भी हो सकती है। दिन में मनुष्य काम करें और machines charge हों और रात में मनुष्य विश्राम या enjoy करें और मशीन काम करें, या light प्रदान करें। देखा जाए तो श्री राम भी अयोध्या अमावस की रात को ही पहुंचे थे।

कई वैज्ञानिक, intellectuals और महान व्यक्ति भी निशाचर ही थे। Predators और निशाचरों का अंतर समझना आवश्यक है। हर predator निशाचर नहीं होता, और हर निशाचर predator नहीं होता।

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