हम चलते ले कर हाथों में हाथ,
दुनिया सिमट सी जाती,
चंद लम्हों में।
ठंडी हवाओं के झोंको से
तुम्हारी लटें करती अठखेलियां
और मैं डूबता तुम्हारी आंखों
की गहराइयों में।
चंद लम्हे और लम्बे फासले,
कुछ यादें और दिल में उबारता एक गुबार,
दुनिया खा जाती है मोहब्बत को,
और बच जाता है एक भागता इंसान।
दीवारों को धक्का देता,
अपने खयालों में डूबा,
बारिशों को याद करता एक इंसान,
आज भी उन सड़कों पर घूमता है।
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