Wednesday, 16 March 2022

ऊर्जा, शक्ति और आदर्श

Feb 18/2021

आजकल Islam और left में भाईचारा बहुत बढ़ गया है या शायद सदा से रहा है। Left की ideology के हिसाब से उसे दबे कुचलों की मदद करनी चाहिए न कि एक ऐसी philosophy की जो exclusion और oppression पर based हो।

जो लोग मूर्तिपूजा पर विश्वास नहीं करते, वो स्वयं एक “literary deity” पर विश्वास करते हैं। आप परमेश्वर को किसी भी रूप में देख सकते हैं। शिव के रूप में जो प्रेम और क्रोध का प्रतीक हैं, विष्णु के रूप में जो order का प्रतीक हैं, या फिर शक्ति के रूप में।

मैं एक चार्वाक की तरह जीवन व्यतीत करता हूँ पर मैं ऊर्जा में विश्वास करता हूँ, वो ऊर्जा शिव के रूप में भी हो सकती है और शक्ति के रूप में भी, वो ऊर्जा एक शिल्पकार के हाथों से एक मूर्ति में भी जा सकती है और किसी किताब के पन्ने पर भी।

Leftist ईश्वर पर विश्वास नहीं करते, लेकिन पता नहीं कैसे Islamic ideologies को समर्थन देते हैं। राजनीति मुझे कभी समझ नहीं आती। चार्वाक होने के बावजूद मुझे शिव के मूर्त स्वरूप अथवा ऊर्जा स्वरूप से प्रार्थना करना मुझे सदा से स्वीकार रहा है।

कोई असुर है या देवता ये जीतने वाले decide करते हैं लेकिन मैं बचपन से श्रीराम से प्रभावित रहा हूँ। उसके अपने कारण हैं, और सबसे बड़ा कारण कि मनुष्य होने के नाते श्रीराम relatable हैं। श्रीराम ने भी लंका जाने से पहले शिव की अर्चना की थी, मैं भी कभी कभी कर लेता हूँ। लेकिन जब भी मुझे भय लगता है तो मैं देवी माताओं के पास ही जाता हूँ।

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