Wednesday, 16 March 2022

चंद्रगुप्त अउर चाणक्य

Oct 28/2020

बिहार भारत क प्राचीनतम civilizations में रहे। पता नाहीं का भइल की ई प्राचीनतम uncivilization में बदल गइल। बिहारी कुल labour बन के बाहर बढ़िया काम करेलन सों पर अपने घरे पता नहीं का हो जाला कि अंदर अउरी बाहर क balance एकदम्मे गड़बड़ा जला। बड़ा खेला बा। लालू लालटेन जला दिहलें लेकिन उ लालटेन क रोशनी खाली यादव लोगन के पहुँचल। पान न खाए क भारी कीमत चुकावे के पड़ल बिहार के। ससुरा जे देखा बइस्ति क के चल जाला। खान साहब अउरी कपूर साहब लोग बिहारी के बकरा मति नाचावेलें। बिहारी बुद्धिमान होलें, लेकिन खान साहिब अउरी कपूर साहिब से डरा जालें। आज के दुनिया में बिहारी क जनम खाली खान साहिब अउरी कपूर साहिब क कुली बने खातीं थोड़े भइल ह। लेकिन बिहारी कुल चतुराई के बाद भी एतना सरीफ बा कि आपन कर्तव्य पूरा करेला। बिहारी बहिरे जाला त आईएस बन जाला अउरी कुछो लायक न भइल त construction क काम त हइये ह। अउरी अपना इहाँ रहेला त चोर अउरी बकचोद बन जला। भट्ट साहिब अपना ड्राइवर के ठीक से रखत हउअन की नाहीं? ड्राइवर के ठीक से रखे के चाही, कब्बो कब्बो, बख्शीश भी दे देवे के चाही।

बिहारियन के West Indies ले जा के चीनी का खेती करा के “भय बिन होई न प्रीति” के सार्थक करल जाला। बिहारी ससुरा दांत चिपोर के बोझा उठावत जाला।

बिहारियन के दारू पिये बदे लुकाये के पड़ेला, इहाँ तक कि चाट खाये बदे भी पर्दा लगावे के पड़ेला। बियाह न भइल त गुड्डू रंगीला बने के पड़ेला। रणवीर सेना क कुल पराक्रम बिहारे तक सीमित दिखाई पड़ेला। अहिरन मति गाड़ी चोरावे अउरी लईकी उठावे से रणवीर न बन जइबा। असली रणभूमि जहां बा उन्हें कुछ होखी, नाहीं त संजय मति खाली महाभारत क खेला देखा।

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