Oct 16/2020
नारीवाद और feminism में एक अंतर है, जहां नारीवाद मौलिक अधिकारों की लड़ाई है वहीं feminism एक power struggle. अनुवाद में बहुत कुछ खो जाता है, जैसे कि हिन्दू राष्ट्रवाद और Hindu Nationalism का अंतर। Individualism पाश्चात्य सोच है, और इसका जन्म मनुष्य की एक कमी के कारण हुआ है और वो है मतलबीपन या अहंकार। एक आम आदमी की दृष्टि से देखें तो इसमें कुछ बुरा नहीं है। Individualism के कई फायदे हैं।
समाज की गुणवत्ता उसमें रहने वाले लोगों से बनती है। जैसे लोग वैसा समाज। अपना समाज हमेशा अच्छा लगता हैं। अपने लोग हमेशा अच्छे लगते हैं। कभी कभी नहीं भी लगते, और जब नहीं लगते तो फिर हम पलायन कर लेते हैं।
हमारे अनुभव अलग अलग हैं और इसलिए हमारे विचार भी। कुछ अहंकार है, कुछ संस्कार है, और कुछ आनुवंशिकी, आजकल काफी कुछ तकनीकी भी है।
मुझे ज्ञान बांटने का कोई शौक नहीं है क्योंकी मेरा हाल जैसे कि कहते हैं, “बड़ी बड़ी बातें, वडापाव खाते” वाला है। लेकिन कभी कभी लिखना पड़ता है क्योंकि जब कोई विचार समझने के बाद भी चम्मच से खाना चाहता हो जिसे अंग्रेज़ी में spoon-feed कहते हैं, तो लिखना आवश्यक हो जाता है।
बिना पिये कुछ नशा हो जाये तो व्यक्ति क्या करे। संस्कृतियों के इस तंत्र में हर कदम फूंक फूंक कर रखना थोड़ा तो कठिन है ही, खासकर तब जब दिव्यांग रहने की इतनी आदत लग जाये कि व्यक्ति आंखें ही न खोलना चाहता हो।
कभी कभी आंखें इतनी बंद हो जाती हैं कि व्यक्ति या तो स्वयं corporate मवाली बन जाता है, या किसी corporate मवाली को पहचान नहीं पाता। मुझे पूंजीवाद से कभी कोई दिक्कत नहीं रही। पूंजीवाद का विरोध करने वालों से एक बार कहिये की वो अपने घर में किसी को मुफ्त में रख लें। विरले ही होंगे जो ऐसा करेंगे। हां, मुश्किल तब होती है जब किसी की अधूरी कहानी या उपन्यास के पूरा होने से पहले ही वो विक्षिप्त हो जाये, या फिर स्वयं विक्षिप्तता फैलाने का एक कारण बन जाये। खैर, एक पुरानी कहावत है, जिसकी लाठी उसकी भैंस।
इरफान खान को एक कविता पढ़ते हुए इंटरनेट पर देखा, ठाकुर का कुआं। हम सब का कोई न कोई ठाकुर है, यहां तक की ठाकुर के भी ठाकुर हैं। जिसके ठाकुर नहीं हैं उसके ठाकुर जी हैं।
राक्षसों को दंड देना आवश्यक है, अगर राज करने वाले स्वयं राक्षस न हों तो। जो कि काफी कठिन है। मेरे विचार से भले दैत्यों को उनके प्रकार (समाज) के साथ रहने देना चाहिए। देवताओं और असुरों में रस्साकशी चलती है। असुर उपद्रवी अवश्य हैं पर जैसा कि हम लोगों ने पढ़ा और टी वी पर देखा है, देवताओं ने भी स्वर्ग के सिंहासन पर आधिपत्य जमाये रखने के लिए कम चतुराई और कभी कभी कुटिलता नहीं दिखाई। निकट दृष्टि दोष के लाभ हैं, और ये आवश्यक नहीं कि निकट दृष्टि दोष वाले से दूरदर्शन का भी कार्य लिया जाए।
An archive of my writings and a place for my writing experiments and projects.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Competent Authority
You imagine a girl painting a picture of you as Tyler Durden from fight club. A pizza delivery boy goes to deliver a pizza at a whorehouse. ...
-
Jay thrashed his fingers across the strings of his bass guitar, the basis notes reverberating through the dimly lit club. The cr...
-
Is life beautiful? Well it depends. Is the world beautiful? Again, it depends. The earth though is beautiful and there is no doubt about tha...
-
He saw his result and closed his eyes. He felt like his head is swirling around in circles. He had never expected that from himself but now ...
No comments:
Post a Comment