Saturday, 21 March 2015

जानवरों के बीच भेड़िया

चीज़ें ऐसे गायब होती हैं जैसे गधे के सर से सींग। गाड़ी जब मुझे एअरपोर्ट ले जाती है तो मैं रास्ता भूल जाता हूँ। अंग्रेजी और हिंदी के बीच रिश्ता तो होना चाहये ना? ऐसा क्या याद किया था मैंने। सब कुछ अंग्रेजी में कहना है क्या। कभी कोई धूम मचायेगा।कभी कोई जल के साथ जलेगा। कभी कोई दोस्तों के साथ गाली गलौच करेगा। ये दुनिया और वो दुनिया अलग अलग नहीं रह सकती। गाडी में दुनिया ऐसे ही चलेगी। मैं चल रहा हूँ ऐसे। आप के पास पैसे हैं। दुनिया ऐसे ही चलेगी। दो सोच का प्राणी। जब जोड़ में आग लगेगी तो दूसरों को शान्ति मिलेगी पर मैं खुद के बदन में ही कैद हो जाऊंगा। मेरे कनवेर्स खुले रखे होंगे। और लोग मेरा मजाक उड़ाएंगे। पर दुनिया ऐसे ही मज़ाक उड़ाती है। बड़ी चीज़ें, बड़े लोग। जब गाडी बर्फ पर चलती है तो खुद की पहचान का डर लगता है। कहीं पुल से न गिर जाएँ। लोग ऐसे हैं। हम कैसे हैं। स्टेपीस का भेड़िया कभी खरगोश हुआ करता था। फिर वो और बड़ा हुआ और भालू बन गया। लोग वही हैं। तरीके अलग हैं। हर तरीका दूसरा है। मैं देख रहा हूँ। कैसी चीज़ें हैं? पुराने लोग। नयी जगह। अच्छे लोग, काइयां लोग, घटिया लोग, बेकार लोग। सब कुछ ऐसा है। जब जूते नए लिए जाते हैं। दुनिया ऐसी ही है। हम भी ऐसे ही हैं। दिमाग में एक तरीका, निकलने का उस दर्द से। ज्ञान की कमी कहाँ से कहाँ पंहुचा देती है। लोग जैसे भी हो हम ऐसे हैं। दुनिया ऐसी है। और बहुत साड़ी चीज़ें ऐसी हैं जो तुम्हे एहसास दिला रहीं हैं क़ि ये तरीका ही सही नहीं हैं। जब लोग ऐसे हैं तो दुनिया मज़ाक है। जानवरों के बीच में या तो निकलो मत, या फिर तैयार रहो।

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