Thursday, 29 February 2024

आदर

सच जानने के बाद व्यक्ति करे तो क्या करे। जो पसंद है वो पसंद है, उसके बारे में कुछ नहीं किया जा सकता। किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद को अगर राजनीतिक रूप दे दिया जाए तो ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। मजे की बात तो तब होगी जब इन सब चीजों के होने के पीछे कौन लोग हैं, इस बात का पता चले। मेरा स्टैक सर्वर कहां है, इस बात से भी चीजों का पता चल जायेगा। मुझे लगता है चीज़ें जितनी मुझे लगती हैं उससे भी सिंपल है। भयानक टॉर्चर, बिना किसी बात के, और शुरु से ही। जवाब देना तो बनता था। ये पता चलने पर कि क्या ये सरकार है, आनंद ही आ जायेगा। राज्य सरकार, या केंद्र सरकार, या क्या पता ये कोई और ही सरकार हो, राज्य और केंद्र सरकार जिसकी गुलाम हो। ये भी हो सकता है कि अपराधियों के गैंग के पास ऐसी तकनीक हो जिससे वो व्यक्तिगत रूप से लोगों को टारगेट कर सकते हों, ऐसा लगता तो नहीं। उस ढोंगी को मेरे बारे में पता होने की वजह से ऐसा लगता है की ये एक ऐसा अरेंजमेंट है जिसमे लोग सीधे नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और उनके विचारों और न्यूरोलॉजिकल इंपल्सेज की लगातार चोरी हो रही है। किस प्रकार के लोग इंवॉल्व्ड हैं, ये मैटर करता है। पूर्वांचल में तो बलात्कारी और रंगदारी मांगने वाला अपराधियों के हाथों में लोगों के दिमाग और जीवन हैं। जो कुछ मेरे साथ हुआ उसका कोई मतलब नहीं था। पर जो हरामी सिर्फ मजे के लिए लोगों का बलात्कार करते हों उनसे उम्मीद भी क्या की जा सकती है। पता नही कौन इन हरामियों के ऊपर है क्योंकि ये किसी के भी साथ कुछ भी करते हैं और उसके कोई कंसीक्वेंस भी नहीं हैं। मेरे दिमाग में अलग अलग किस्म की कहानियां बनी हुई हैं। जैसे कि कॉलेज के समय में मैंने अपने आपको ऐसा दिखाया जैसा मैं नहीं था, और अब मैं जो कि पूर्वांचल जैसे पिछड़े प्रांत का हूं, अपनी बेइस्ती बचा रहा हूं। वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है पर जब लोगों के शरीर और मस्तिष्क पर नियंत्रण किया जा सकता हो तो एक घिनौना बलात्कारी अपने छोटे दिमाग से कुछ भी सोचे तो वो आपको महसूस करना पड़ेगा। 

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