Friday, 19 May 2017

सूरज जब सोता है

सूरज जब सोता है
शाम जब ढलती है रात में
आता है जब अँधेरा
लेकर चाँद और तारे साथ में
तब होती है इक उम्मीद
फिर एक नया सवेरा आएगा
जगमग धरा को कर जाएगा
फिर से रोशन होगी ये धरती
चहचहाएंगीं फिर वो चिड़िया उड़ती
सूरज जब सोता है
देता है वह उम्मीद
होगा फिर से प्रफुल्लित ये मन
होगा उज्जवल फिर से ये उपवन

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