लड़ता वह परिस्थितियों से,
जूझता झंझावातों में;
सारगर्भित ह्रदय ले कर,
अहंकार से करता दो-दो हाथ।
बोया गया एक पाप का बीज,
जो उगता एक पेड़ स्वरूप;
जैसे विषधर हो लगें चन्दन पर,
ऐसा लेता वह रूप।
बन के लकड़हारा वह,
काटता वह पाप का पेड़;
रात जैसी कालिमा छंटेगी,
और खिलेगी हर्ष की धूप।
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