असंभव को संभव करने चला
द्वैत को अद्वैत करने चला
भीषण पथ पर अग्रसर
करने चला वह सबका भला
भय स्वयं का उसको अनंत
स्वयं विजय ही भय का अंत
अंत में हो सबको आनंद
सोचता चला वह जीवन पर्यन्त
प्रेम का है दूत वह
अभागों का वह भाग्य
दीनों का वह दुःख समझता
ऐश्वर्य में वह वैराग्य
पीड़ा का करने वह अंत
चला वह उस पथ पर
जीवन के अंधकार में
बना वह उज्जवल दिनकर
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