आज फिर उसने होमवर्क नहीं किया. पीछे कि बेंच पर बैठ कर वो अपनी नाक कि मैल के गोले बना रहा था. मास्टर जी पहली बेंच से सबका होमवर्क देखते आ रहे थे. निशांत का एक सवाल गलत होने पर उसको मार पड़ी. सुखदेव ने दो सवाल नहीं किये थे उसको मास्टर जी ने बहुत मारा. कभी कभी वो सोचता है कि गणित का अध्यापक होने के बाद भी मास्टर जी को हिसाब नहीं आता. निशांत का एक सवाल गलत होने पर उसको दो थप्पड़ और नीरू के चार सवाल गलत होने पर भी उसको एक थप्पड़. दुसरो को गणित सिखाते हैं मास्टरजी, उनकी खुद कि ही गणित इतनी कमजोर है.
मास्टरजी एक पगलाए सांड कि तरह बढे आ रहे थे. हर बेंच पर बैठे बच्चे को प्रसाद मिल रहा था. उसने तो एक भी सवाल नहीं किया था पाता नहीं उसकी हालत क्या होने वाली थी. उसने अपनी बहती नाक अपनी शर्ट में पोंछी और मास्टर जी को देखता रहा. उसकी दिल कि धड़कने तेज़ होने लगी थी. आखिरकार मास्टरजी उसके पास आ ही गए. 'जीवन होमवर्क दिखाओ!' मास्टरजी ने कहा. उसने अपनी कॉपी मास्टरजी के हाथ में देदी. मास्टर जी कॉपी ले कर पन्ने पलटने लगे. उसकी टाँगे कांपने लगी थी. 'होमवर्क कहाँ है?' मास्टरजी ने गुर्राते हुए पूछा. उससे जवाब न देते बना, उसका गला सूख चूका था, बोलने के प्रयत्न में उसने अपना थूक निगला. तड़ाक! मास्टरजी का झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गालों पर लगा. 'जब पढना नहीं है तो स्कूल क्यों आता है बे?' मास्टरजी ने एक और तमाचा रसीद किया. 'घर पर क्या करता है? सारा समय हरमजदगी में जाता होगा. आज घर पर आता हूँ तेरे. आज बताता हूँ तेरी माँ को कि उनका लाडला क्या गुल खिला रहा है.'
'माँ तो मर गयी!' हकलाते हुए उसने बोला. मास्टरजी अवाक रह गए. 'कब?', धीरे से उन्होंने पूछा. 'कल रात' उसने गाल पकडे हुए जवाब दिया. मास्टर जी ने उसके सर पे हाथ फिराया और आगे बढ़ गए.
उसे पता था कि कल जब उसका झूठ पकड़ा जाएगा तो दोगुनी धुलाई होगी. उसने आँखें बंद कि और भगवान् से प्रार्थना करने लगा कि कल कभी न आये.
Lovely...
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