साहित्य में मेरी रुचि बचपन से रही है। मैंने कई हिंदी एवं अंग्रेजी लेखकों को पढ़ा है, परंतु पढ़ने की आदत कई दिनों से छूटी हुई है। हिंदी बहुत दिनों से नहीं पढ़ी, और अंग्रेज़ी में भी मेरी पसंद आजकल कुछेक लेखकों पर ही आ कर खत्म हो जाती है। मेरी हिंदी लेखनी अभ्यास के अभाव में काफी प्रभावित हुई है। बचपन में बाबा मुझे हिंदी की किताबें और पत्रिकाएं लाकर देते थे। मुझे अभी भी याद है जब बाबा ने मुझे मेरे जन्मदिन के अवसर पर नन्हे सम्राट ला कर दी थी। मैं बचपन में काफी कॉमिक्स पढ़ा करता था। ग़ाज़ीपुर में एक दुकान हुआ करती थी जिसपर एक रुपये की कॉमिक्स किराये पर मिला करती थी, चाचा मुझे वहां से कॉमिक्स ला कर देते थे। मुझे अभी याद है कि वहां से मैं भोकाल और एंथोनी इत्यादि की कॉमिक्स ले कर पढ़ा करता था।
नगीना में भी मम्मी मुझे अखबार वाले से खरीद कर पत्रिकाएं और कॉमिक्स देती थीं। कई बार मैं खुद पापा के साथ दुकान पर जा कर पत्रिकाएं और कॉमिक्स ले आता था। मेरे पास कॉमिक्स का भंडार था जो मुझे बहुत ही प्यारा था।
थोड़ा बड़ा हुआ तो मैंने हैरी पॉटर पढ़ी, जो कि मुझे बहुत पसंद आई। कॉलेज में आया तो मैने चेतन भगत की 5 पॉइंट समवन पढ़ी जो मुझे अच्छी लगी। मैंने पत्रिकाओं में कई हिंदी लेखकों को पढ़ा। मैंने कई हिंदी एवं अंग्रेज़ी लेखकों की कहानियां पढ़ीं।
फिर बारहवीं कक्षा में मैंने स्वयं लिखना आरभ किया और हिंदी और अंग्रेज़ी में कई कहानियां और कविताएं लिखीं। मेरा पढ़ने का शौक बढ़ा और मैंने चक पलाहनियक जैसे लेखकों को भी पढ़ा।
इस साइट पर मेरा यह ब्लॉगपोस्ट है बहुत दिन बाद आया है। और अब से ये मेरा प्रयत्न रहेगा कि मैं जितना हो सके हिंदी और अंग्रेजी में लिख सकूँ।
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