झीलों में तैरते हंसो को देखा,
नीले पानी में देखी अपनी छाया,
काले कौवों का कर्कश स्वर,
आखिर किसने बनाई ये माया।
खेतों में फसल काटते किसान,
धूप से काली जर्जर काया,
ट्रैक्टर पर बैठे उनके सहोदर,
कुछ ने खोया कुछ ने पाया।
रात की चांदी करती चमचम,
चंदा देखो शीतलता लाया,
सजग हो उठे रात्रिचर,
श्वानों ने अपना गान गाया।
उगता सूर्य ललित हो उठा
दिन से रात फिर दिन आया
चक्र समय का चलता रहता,
चिड़ियों ने फिर दाना खाया।
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